मधुरजनी

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में चाँद और ये मेरी सखी. देखो, देखो आज वो जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रही है. आज रात उसकी अपने जीवनसाथी से पहेली प्यार भरी मुलाक़ात है. कल अमावस्या थी और आज में नया होके खिलने की शुरुआत कर रहा हूँ. चलो थोडा ही सही पर नज़र तो आ रहा हूँ, और उसे देख तो सकता हूँ. पर ये क्या – मेरी सखी क्या सोच रही है? की चलो नया सा चाँद आज अपनी चांदनी फैलाकर मेरे साजन के सामने मुझे शर्मिंदा तो नही करेगा ना. ओ सखी! तेरे प्यार का तो में इकलोता गवाह हूँ, मुजसे कैसी शर्म? तु अपने मनके, तनके बन्धनों से मुक्त हो कर, दिलके बन्धनों में बंध जा, आज अपने साजन से प्यार कर ले.

ओ सखी, आज तक तो तु मेरी तरफ देखकर अपना प्यार जताती थी की ये चुम्मी मेरे साजन के दाहिने गालो के लिए, ये बांये गालो के लिए, ये प्यार भरी चुम्मी से उनका माथा चूमना, और इससे उनके होठो का रस पीना. मगर आज तो सखी तुमने मेरी तरफ देखा भी नही, जो बाते मुजसे करती थी वो सारी बातें अपने साजन को सुना रही हो. और ये तेरा साजन जो रोज़ मेरी तरफ देखकर तुज़े याद करता था, वो भी मेरी तरफ देख ही नही रहा. मुजे जलन सी होने लगी हे, शुक्र हे आज पूनम नही, वरना तो में जलन से पूरा का पूरा सूरज जैसा तप जाता. ओह! मुजसे देखा नही जा रहा हे, कोई तो मेरी मदद करो, ओ बादलो मुजे अपने में समा लो, या बरसने लगो ताकि मुजे धरती दिखे ही नही. अरे, क्यों नही बरस रहे हो??

ओ चाँद आज तो हम नही बरस पायेंगे! रोज़ तुम्हारी सखी हमारे हाथो अपने साजन को संदेश भेजा करती थी, आज तो उसने हमसे मुह मोड़ लिया. देखो, तुम्हारी सखी और उसका प्रियतम, जैसे प्यार बरसा रहे है वैसा तो हमने भी कभी महसूस ही नही किया. इतनी नरमी से बरसते तो धरती प्यासी रह जाती और ज़ोरों से बरसते तो तूफ़ान आ जाता, ये जादू तो हमने भी आज पहेली बार देखा – इन दोनों का कोमल तूफानी प्यार. हे चाँद आज तेरे जलने से हम बादल सुख से गये. ओ धरती तु ही तो चाँद की सखी के करीब हे, तु क्यूँ नही कुछ करती?

अरे चाँद, ओ बादलो, तुम दोनो के सामने ये दोनों का प्यार चमक रहा हे, ये देख रही हूँ. ओ चाँद तुम्हारी सखी हर वो जगह जहाँ पर उसके साजन ने पैंर रखे थे, मन ही मन मुजे वहाँ वहाँ चूमा करती थी. आज मेरी तरफ उसकी बेरुखी देखकर में स्थिर सी हो गयी. कोरी धरती कुछ कर नही शकती. चाँद आज तुम्हारी सखी तो प्यार से तृप्त हो गयी, मगर ओ बादलो तुम नही बरसे, कोई तो मेरी मदद करो. ओ फूलो, मैंने अपने सीने से लगाकर तुम्हे सीचा और खिलाया, क्या तुम मेरी बात नही सुन रहे?

ओ धरती माता देखो, चाँद की सखी अपने साजन का प्यार पा कर कैसी खुशी महेशुश कर रही हे… ओ चाँद देखो…. ओ चाँद… ओ चाँद…. कहाँ भागे जा रहे हो….. अरे चाँद तुम तो लुप्त हो गये… हाँ सूरज की पहेली किरन आने लगी… देखो, ये चाँद की सखी बहार आ गयी, कितनी लाली आ गयी हे उसके चेहरे पे, कैसा खिला खिला लग रहा हे ये चेहरा. ये तो मेरे पास आ रही हे, मुजे छु रही हे कह रही हे “ए फुल सुन, आज में तेरी तरह खिल गयी, धरती की तरह तृप्त हो गयी, बदलो की तरह बरस पड़ी और चाँद की तरह शीतल हो गयी, तुम लोगोने मेरा प्यार और मेरी जिंदगी सफल कर दी, धन्यवाद”.

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